अमराई में कहईं कोइलि
बोल गइल ह।
मोजर गंध हिया के बान्हन
खोल गइल ह।
उसठा होंठ कसाँइन लागे
आँखिन चढ़ल खुमार सगुन के।
कवन निगोरा टेसू बन में
आग लगावल?
कोना आँतर में मुरझाइल
राग जगावल।
पनख रहल मनगुपुते डारी
अँखुवन से गँउजार तरुन के।
कुइँ दल खिलल भँवर मदमातल,
घूप थिराइल।
तलई के पानी में केकर
रूप हिराइल?
बउराहिन जलमछरी जोहे
पता न कउँची खाक-बिहुन के।
रतियो कुछ गर्हुआइल जइसन,
चैन उपाटल।
ना सुख सपन सिराइल तबले,
नीन उचाटल।
बन पाँखी के तान तान से,
बेध रहल ह सभ सुनगुन के।
- दिनेश पाण्डेय